Blog Post

इलेक्टोरल बॉन्ड डेटा

इलेक्टोरल बॉन्ड डेटा: सबसे ज्यादा किन कंपनियों ने खरीदे इलेक्टोरल बॉन्ड ? कोन कोनसे बड़े-बड़े प्लेयर शामिल, लिस्ट देखिए

इलेक्टोरल बॉन्ड डेटा : सुप्रीम कोर्ट की बहुत तगड़ी और बड़ी फटकार के बाद में एसबीआई (SBI)ने अपने इलेक्टोरल बॉन्ड का डाटा चुनाव आयोग को सबमिट करवा दिया है इसके बाद में चुनाव आयोग ने गुरुवार 14 मार्च 2024 को शाम को अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर इलेक्टोरल बॉन्ड की जानकारी पब्लिकली लोगो के साथ साँझा कर दी गई है |
इस इलेक्टोरल बॉन्ड में किस कंपनी ने कितने इलेक्टोरल बॉन्ड ख़रीदे है और किस तारीख को किस राजनितिक पार्टी को कितना चन्दा दिया है इसकी पूरी जानकारी विस्तार से दी गई है हालांकि अभी इस लिस्ट में देश की दो सबसे बड़ी कंपनी अदानी ग्रुप और रिलायंस इंडस्ट्रीज का नाम नहीं है |

इलेक्टोरल बॉन्ड डेटा

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद चुनाव आयोग को यह डाटा जारी करने के लिए कहा गया था क्युकि जिसके बाद में इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदने वाली कंपनियों और उसे चंदा पाने वाले राजनीतिक पार्टियों के नाम की जानकारी देश के लोगो साथ साँझा हो सके | लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यह जानकारी जनता के लिए उनकी चुनाव आयोग की वेबसाइट पर अपलोड कर दी गयी है |
इलेक्टोरल बॉन्ड डेटा
चुनाव आयोग द्वारा सार्वजनिक किये गए डेटा से इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदने वाली बहुत बड़ी बड़ी कंपनियों के नाम का खुलासा हुआ है | जिसकी जानकारी नीचे दी गई है इसमें किसी राजनीतिक पार्टी ने कितना चंदा लिया है और किस कंपनी ने कितने ज्यादा इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदें है |

किस कंपनी ने कितना चंदा दिया है |

अब तक जारी लिस्ट में अनेक कंपनियों के नाम शामिल है जैसे की बजाज फाइनेंस, वेदांता लिमिटेड, मेगा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड, अपोलो टायर्स , भारती एयरटेल लेकिन इसमें से अभी तक इस लिस्ट में सबसे ज्यादा 1208 करोड रुपए का चंदा देने वाली कंपनी फ्यूचर गेमिंग एंड होटल सर्विसेज है |
उसके बाद में मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड कंपनी ने 83 करोड रुपए के इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदे हैं, और एस्सल माइनिंग कंपनी ने 224.5 करोड रुपए का चंदा उन्होंने पार्टी को जमा कराया है इसके अलावा क्विक सप्लाई चैन प्राइवेट लिमिटेड में 410 करोड रुपए के इलेक्टोरल बॉन्ड लिए है | वेदांता लिमिटेड कंपनी में भी 375.65 करोड रुपए के इलेक्ट्रॉल बांड खरीदे गए हैं इसके अलावा और कौन-कौन सी कंपनी शामिल और उसने कितना चंदा लिया है जिसकी लिस्ट नीचे आपको दी गई है |

कौन-कौन सी कंपनी शामिल और उसने कितना चंदा लिया है

  • फ्यूचर गेमिंग और होटल सर्विसेज – 1,368 करोड़ रुपये
  • मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड – 966 करोड़ रुपये
  • क्विक सप्लाई चेन प्राइवेट लिमिटेड – 410 करोड़ रुपये
  • वेदांता लिमिटेड – 400 करोड़ रुपये
  • केवेंटर फूडपार्क इन्फ्रा लिमिटेड – 194 करोड़ रुपये
  • मदनलाल लिमिटेड – 185 करोड़ रुपये
  • डीएलएफ ग्रुप – 170 करोड़ रुपये
  • यशोदा सुपर स्पेशियल्टी हॉस्पिटल – 162 करोड़ रुपये
  • उत्कल एल्यूमिना इंटरनेशनल – 145.3 करोड़ रुपये
  • हल्दिया एनर्जी लिमिटेड – 377 करोड़ रुपये
  • भारती ग्रुप – 247 करोड़ रुपये
  • एस्सेल माइनिंग एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड – 224 करोड़ रुपये
  • वेस्टर्न यूपी पावर ट्रांसमिशन – 220 करोड़ रुपये
  • जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड – 123 करोड़ रुपये
  • बिड़ला कार्बन इंडिया – 105 करोड़ रुपये
  • रूंगटा संस – 100 करोड़ रुपये
  • डॉ रेड्डीज – 80 करोड़ रुपये
  • ग्रासिम इंडस्ट्रीज – 33 करोड़ रुपये
  • जिंदल स्टेनलेस – 30 करोड़ रुपये
  • बजाज ऑटो – 25 करोड़ रुपये
  • सन फार्मा लैबोरेटरीज – 25 करोड़ रुपये
  • मैनकाइंड फार्मा – 24 करोड़ रुपये
  • बजाज फाइनेंस – 20 करोड़ रुपये
  • पीरामल एंटरप्राइजेज ग्रुप – 60 करोड़ रुपये
  • नवयुग इंजीनियरिंग – 55 करोड़ रुपये
  • शिरडी साई इलेक्ट्रिकल्स – 40 करोड़ रुपये
  • एडलवाइस ग्रुप – 40 करोड़ रुपये
  • सिप्ला लिमिटेड – 39.2 करोड़ रुपये
  • लक्ष्मी निवास मित्तल – 35 करोड़ रुपये
  • मारुति सुजुकी इंडिया – 20 करोड़ रुपये
  • अल्ट्राटेक – 15 करोड़ रुपये
  • टीवीएस मोटर्स – 10 करोड़ रुपये

इलेक्टोरल बॉन्ड पर क्यों उठे सवाल?

सबसे पहले तो आपको यह जानना चाहिए कि आखिए कार इलेक्टोरल बॉन्ड क्या है और यह कब और किस लिए देश में जारी किया गया, इलेक्टोरल बॉन्ड राजनीतिक पार्टियों को चंदा देने का एक वित्तीय तरीका है जिसकी शुरुआत भारत सरकार ने साल 2017 में की थी और इस योजना को सरकार ने 29 जनवरी 2018 को कानून लागू करके जारी कर दिया गया था |
इस योजना के तहत भारतीय स्टेट बैंक राजनीतिक दलों को दान देने के लिए बॉन्ड जारी कर सकता था इस इलेक्टोरल बॉन्ड को खरीदने के लिए इसमें कोई लिमिट नहीं थी कोई भी व्यक्ति कितने भी रुपए के इलेक्टोरल बॉन्ड खरीद सकता था और उसे समय पर भारत सरकार ने इस योजना की शुरुआत करते हुए कि कि यह राजनीतिक फंडिंग की व्यवस्था को साफ करने में सहयोग करेगा |
इस इलेक्टोरल बॉन्ड को जारी करते समय यह नियम रखा गया था कि इसमें पैसे दान करने वाले की जानकारी को गुप्त रखा जाएगा जिसको किसी भी व्यक्ति के साथ में साँझा नहीं किया जाएगा लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इस कानून को संवैधानिक माना और इसे हटाते हुए (SBI)एसबीआई को सख्त निर्देश दिए कि वह इलेक्टोरल बॉन्ड की जानकारी चुनाव आयोग के साथ साझा करें और इसके बाद में चुनाव आयोग अपनी वेबसाइट के माध्यम से लोगों के साथ में साझा करें |
इलेक्टोरल बॉन्ड डेटा के बारे में आप अपना ओपिनियन या अपनी राय भी नीचे कमेंट के रूप में बता सकते हैं आप चाहे तो नीचे इस पोस्ट के लिए वोट भी कर सकते हैं |

इस पोस्ट को अपने दोस्तों से साथ शेयर करे और अपना वोट और अपनी राय जरूर दे |

Loading poll ...
Loading poll ...

इस पोस्ट को अपने दोस्तों से साथ शेयर करे और अपना वोट और अपनी राय जरूर दे |
0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments
0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x
सबसे ज्यादा किन कंपनियों ने खरीदे इलेक्टोरल बॉन्ड ? कोन कोनसे बड़े-बड़े प्लेयर शामिल, लिस्ट देखिए